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Children's
Story Writing is a good creative outlet and can be used to
inspire others. |
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Rishton
Ka Mahatv -
रिश्तों का महत्व
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सेठ
जी की अमीरी हवेली के बाहर से ही देखी जा सकती थी-सुंदर नक्काशीदार विशाल
दरवाजा जिससे अंदर जाते ही तरह-तरह के देशी-विदेशी पौधों,
रंग-बिरंगे फूलों से लदा विशाल गार्डन,
गाड़ियां,
पचासों नौकर-चाकर
,कई
दासियां,
राजा-महाराजाओं जैसी शान-शौकत। |
और हवेली के अंदर तो जैसे एकदम स्वर्ग का सा आनन्द,
एक
से एक लग्जरी सामान,
झाड़-फानूस,
सभी
ऐशो-आराम थे । लगता था लक्ष्मी पूर्णरूप से मेहरबान थी सेठ जी पर ।
सेठ
जी का भी क्या मैनेजमेंट था…एक-एक सामान को ऐसे सहेजकर रखा था कि मज़ाल है
कहीं कोई धूल का कण भी उसे छू जाए…हवेली के हर सामान में उनकी जान बसती थी ।
एक दिन उनकी गाड़ी को किसी ने टक्कर दे मारी थी…घर पर किसी ने दो दिन तक खाना
भी नहीं खाया उसके दु:ख में ।
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एक
दिन अचानक हवेली के अंदर से तेज-तेज आवाजें आना शुरू हो गईं । कोई अंदर भाग
रहा था तो कोई बाहर । कुछ ही देर में सेठानी दौड़ती हुई बाहर आई
और
हांफती हुई बोली-`आग
! आग !´
बड़ा
बेटा जो गार्डन में टहल रहा था,
भागा-भागा अंदर गया और अपने प्यारे से डॉगी को बाहर निकाल लाया । |
बाहर
खड़े लोगों ने हवेली की ओर देखा-खिड़कियों से बाहर धुआं निकल रहा था,
सेठ
जी तथा घर के अन्य लोग भी बाहर आ गए थे । सभी नौकरों को चिल्ला-चिल्ला कर
अपना-अपना सामान लाने का आर्डर दे रहे थे - सेठ जी ने आवाज लगाई-`अरे
! कोई वो बड़ा बाला संदूक बाहर निकालो ।´
सेठानी चिल्लाई-`अलमारी
से मेरी ज्वेलरी लाओ
,
वो
डायमंड वाला सेट वहां लॉकर में पड़ा है…।´
बड़ा
बेटा बोला-`मेरा
सेल फोन वो ड्राईंग रूम की टेबल पर रह गया…धीरे-धीरे सभी कीमती सामान बाहर आ
गया ।
अंत
में सेठ
जी
का पोता जो छह साल का था दौड़ता हुआ हवेली के अंदर गया और कुछ देर बाद व्हील
चेयर पर बैठे अपने दादाजी को लेकर बाहर निकला।
रिश्तों का महत्व आज
सभी
की
समझ
में आ गया था ।
Contributing Story Teller:
अमृता गोस्वामी
जयपुर
राजस्थान Freelance writer
especially write articles/stories/poems related to kids.
amrita_delhi@rediffmail.com
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