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पंछी प्यारे
कहां गए वो पंछी प्यारे
भोर होते ही आसमान पर
उड़ते थे जो पंख पसारे
कहीं डाल-डाल कहीं पांत-पांत
मीठी-मीठी तान सुनाते
कहां गईं अमरूद की डालें
जिन पर बैठ तुम फल गिराते
कहां गए वो नीम वो पीपल
जिन पर थे तुम रात बिताते
कर जाओ फिर बसेरा वन में
झील किनारे नील गगन में
Contributed By :
अमृता गोस्वामी
जयपुर
राजस्थान
Freelance writer especially
write articles/stories/poems related to kids.
amrita_delhi@rediffmail.com |
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