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Kavita Aur Ghazal
बड़ा सादा त्यौहार है रक्षाबंधन
भाई-बहन का प्यार है रक्षाबंधन
भाई पर दुआओं की बौछार हे ये
बहन की रक्षा का करार है रक्षाबंधन
हर महजबो-जात का त्यौहार है ये
सच बड़ा खुशगवार है रक्षाबंधन
राखी बांधने ,बंधवाने के लिए
हर बहन -भाई बेकरार है , रक्षाबंधन
दिखने में है ये रंगीन धागा लेकिन
धागा नहीं ऐतबार है रक्षाबंधन
हर दुआ, हर करार ताजा करने को
अब के फिर तैयार है रक्षाबंधन
माथे पर तिलक,हाथों में राखियां
'अनुज' जी़नते-प्यार है रक्षाबंधन ।।
2
कच्ची मिट्टी के मटके हैं
हम नन्हें, नन्हें बच्चे हैं
खेलने की उम्र में हम
ढ़ोते भारी-भारी बस्ते हैं
अध्यापक जी
डालते हैं हर-रोज
हम पर पढ़ाई का बोझ
वो हमारी व्यथा कब समझते हैं
माननीय अध्यापक जी,
आपके हम आज्ञाकारी शिष्य हैं
इस भारतवर्ष का भविष्य हैं
माननीय अध्यापक जी,
'तारे जमीं पर' फिल्म देख आओ
और उसको अमल में लाओ
उसी तर्ज पर हमको पढाओ
हमसे अच्छे-अच्छे परिणाम पाओ
3
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ
शहर को हरा भरा बनाओ
शहर में हो गया है धुआं-धुआं
जीना मुहाल हो गया यहां
हवा जहां कि धूल भरी
कैसे खिले कोई फूल-पंखुरी
मैला-मैला है पानी यहां
परेशां है जिंदगानी यहां
कुछ तो जतन सुझाओ
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ
शहर को हरा भरा बनाओ
पेड़ शहर को हरा भरा कर देंगे
फि़जाओं में खुश्बू भर देंगे
ये धुआं गुम हो जाएगा
खुशमिजाज मौसम हो जाएगा
तो क्यूं न पेड़ लगाओ
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ
शहर को हरा भरा बनाओ
इस मटमैले पानी को
कैसे साफ रखे जिंदगानी को
जागृति अभियान चलाओ
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ
शहर को हरा भरा बनाओ
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Contributing Poet
Dr.Anuj Narwal Rohtaki
dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com
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