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Jo Deep Nahin Bujhte
जो दीप नहीं
बुझते तूफानों
में भी,
उजियारा उनका
अभिनन्दन करता
है|
जो जलते केवल
जलने को,
दब जाते स्वयम
अंधियारे तले,
जो दीप नहीं
बुझते तूफानों
में भी,
उजियारा उनका
अभिनन्दन करता
है|
जो पग नहीं रुकते
कांटो पे भी,
जग उनका अभिनन्दन
करता है,
गिरना, फिर उठना
जीवन का क्रम
है,
गिर के भी जो
उठाना जाने,
सोपान उसका
अभिनन्दन करता
है|
जो निश्चय करते
हर श्वास में,
तप करते आत्म
तेज पुंज से,
विष पी शिव ज्योति
धारण करते,
जो बाण नहीं
मुड़ते बिंध
जाने पे,
लक्ष्य उनका
अभिनन्दन करता
है|
जो दीप नहीं
बुझते तूफानों
में भी,
उजियारा उनका
अभिनन्दन करता
है|
सुमन (मौली)
Contributing
Poet Suman is a professional technical
communicator and a poetess. She loves to write poems in Hindi, English,
and Urdu.
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