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Collection of Ghazals

अपना लीजिए या ठुकरा दीजिए, फैसला आज मगर सुना दीजिए
अपना कहने में मुझे, आए गर हया तुझे, समझ जाऊंगा बस मुस्कुरा दीजिए
तुमको चाहता हो गर कोई मेरे सिवा, मुकाबला उसका मुझसे करा दीजिए
तेरी गोद में रखकर सिर सो जाऊंगा, मेरे बालों में हाथ फिरा दीजिए
जिंदगी जीने में आसान हो जायेगी, मय-ए-मुहब्बत मुझको पिला दीजिए
सब कुछ अपना बना लीजे इश्क को, फर्क, धर्म, जात का ये मिटा दीजिए
शेख जी खुद को जो भी कहे पारसा, आईना आज उसको दिखा दीजिए
आने वाला है अब महफिल में 'अनुज', कहीं दिल, कहीं पलकें बिछा दीजिए।
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मेरे खत का कुछ यूँ जवाब भेजा है, बंद लिफाफे में लाल गुलाब भेजा हैबू-ए-वफा आ रही है इस गुल से, नए तौर से इश्क का खिताब भेजा है

जश्न का माहौल है आज मेरे दिल में, मेरे सवाल का सही जवाब भेजा है
मुरझाया हुआ चेहरा फिर खिल गया, मेरे लिए ईलाज-ए-इज्तिराब भेजा है
'अनुज' खोल दी है तेरी किस्मत उसने, बनाके हकीकत हर ख्वाब़ भेजा है
--------.

यूँ तो ख्वाहिश सरे-लब बहुत, सोचो तो दिल में तलब बहुत
तारे गिनने से बात न बनेगी, गुजारनी बाकी हैं शब बहुत
इश्क में पनाह फलां हो गया, रोने को हमें ये सबब बहुत
खयाल-ए-वरक़, दर्दे-कलम, दिले किताब में शेरो अदब बहुत
जहां महकाने को 'अनुज' जी, मुहब्बत का इक हब बहुत
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अश्क बनकर भी मैं बह नहीं सकता, बात कुछ ऐसी हुई कह नहीं सकता
इतनी अज़ीज़ है मेरे दिल को तू, इक पल की जुदाई सह नहीं सकता
इश्क तो करता है वो मुझसे ही, सरेआम मगर वो कह नहीं सकता
किसी ने ठीक ही कहा है- 'ये इश्क', जमाने से छिपकर रह नहीं सकता
ऐसी क्या बात देख ली उसमें 'अनुज', जो तू उस के बिना रह नहीं सकता
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आईने में देखकर शक्ल अपनी रोते हैं हम, तनहाई में इसकदर खौफज़दा होते हैं हम
तेरी चाहत हमारी जरूरत बन गई है शायद, है यही सबब कि तेरे हर नाज ढ़ोते हैं हम
दिन कामों में गुजर जाता है पर शाम होते ही, साक़ी, शराब, महखाने के साथ होते हैं हम
बेबात, बेसबब हमसे ओ नाराज़ होने वाले, जा तेरी इसी बात से नाराज होते है हम
सोचता हूं रिश्तों को महफूज रखने के लिए, शर्त, समझौता ये सब वजन क्यों ढोते है हम
जिंदगी से दामन भी नहीं छुड़ाया जाता 'अनुज', याद आते तुम, मरने को जब होते है हम
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Contributing Poet  Dr.Anuj Narwal Rohtaki ----INDIA
E-Mail-   dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com

 

 

 

 

 

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