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कविताएं

बादल अंकल, बादल अंकल
तुम तो हो बड़े ही चंचल
रात हो या हो दोपहरी
घूमते हो तुम नगरी-नगरी
ज़मीन की तुम बुझाते हो प्यास
हर प्राणी की तुम हो आस
हमारी नगरी तुम जब भी बरसे
ख़ास पकवान खाने को हैं मिलते
पर जब तुम बेमौसम आते हो
किसानों की मुसीबत बन जाते हो
कृपा तुम ऐसे न आया करो
सावन रुत में ही बूंदें बरसाया करो
यानी धरा में सौंधी खुशबू उगाया करो
जब भी, जहां भी बरसा करो
पहले वहां के बारे में सोचा करो

2
गर्मी हो या हो सर्दी पल भर के लिए भी न रूकें
रिंकी-पिंकी, गोलू-मालू मिलके सब आगे बढ़ें
मन लगाकर खूब पढ़ें आओ स्कूल चले
आओ स्कूल चले

नेक राह पर चलते रहें हम अर्ज़ी मालिक से करें
स्वस्थ रहने के लिए कसरत हर रोज़ करें
आदर करें बड़ों का हम गुरूजनों का सम्मान करें
आओं हरेक सपने का हकीकत रूप धरें
अपने ज्ञान की ज्योति से प्रकाशमान जगत को करें
हिंदू बने न मुसलमान बने बनना है तो इंसान बनें
पढ़ने और पढ़ाने का सत्य प्रयास बन
आओ स्कूल चलें

3
होना है अगर कामयाब
तो खुद पर रखिए एतमाद
काम करने से पहले करो तुम खुदा को याद
ऐसा अगर हो गया मुझको है एतबार
छा जाएंगे आप हौसलें बुलंद हों
दिल में उमंग हों काम में लगन हो ऐसी
देख, मुश्किलें दंग हों जीवन जीने के लिए
सबसे अलग ढ़ंग हो बात अगर ये जम गई
फिर तो वक्त करेगा वही जो चाहेंगे आप
मुझको है एतबार छा जाएंगे आप
ज़िंदगी नहीं मिली अपने लिए अपने लिए तो सब है जिए
सब हैं जिए अपने लिए अपने लिए तुम जिए
तो फिर तुम क्या जिए औरों की खुशी के लिए
आप अगर हैं जिए सब के लबों पर
मुस्कुराऐंगें आप मुझको है एतबार छा जाएंगे आप
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डॉ0 अनुज नरवाल 'रोहतकी' 454/33 नया पड़ाव, काठ मंडी,
रोहतक-124001, हरियाणा, हिन्दुस्तान
ईमेल : dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com


   

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