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बाढ़ का पानी
---ओंम प्रकाश नौटियाल
जिस जगह जाती नज़र , है मंजर तबाही का
देखो कहाँ तक फैला बेदर्द बाढ़ का पानी ।
नदियाँ कहाँ अब जा रही, सागर से मिलने को
समंदर को अन्दर ला रहा ,जालिम बाढ़ का पानी ।
सड़के नहीं रही थी , जो पैदल के भी लायक
सफीने वहां चलवा रहा, गहरा बाढ़ का पानी ।
उनके हवाई दौरे , घडियाली आंसू और वादे
क्या नौटंकी करवा रहा , विदूषक बाढ़ का पानी ।
बनता बड़ा जाँ बाज , उछल कर ऊँचे बांधो से
दीन झुग्गियां डूबा रहा , निर्दयी बाढ़ का पानी ।
छोटा बड़ा जो भी मिला सबको साथ ले गया ,
कितनो के प्राण पी गया ,प्यासा बाढ़ का पानी ।
जलमग्न सब कुछ कर ,अब बड़प्पन दिखा रहा
बनता है पानीदार , महा ढोंगी बाढ़ का पानी ।
Poetry By :
----Om
Prakash Nautiyal,
engaged in
academic activities. Writing Hindi poems is my long pursued hobby. ompnautiyal@yahoo.com
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